पौराणिक काल से बस्ती का एक अलग स्थान रहा है भगवान विण्णु के बाराह अवतार कि मान्यतओ से ज़ुडे बस्ती जनपद के बाराह क्षेत्र से शुरु हुई धार्मिक यात्रा आगे बढती रही। भगवान श्री राम के जन्म की कारक माने जाने वाला पुत्रेष्ठ यज्ञ बस्ती की धरती मख धाम { मखौडा } मे हुआ।
इसी यज्ञ के बाद राम, लक्ष्मन, भरत, शत्रुधन का जन्म हुआ।
पवित्र मनवर नदी के किनारे स्थित मखौडा की यज्ञशाला क्षध्दलुओ के आस्था का केंन्द्र है। यज्ञ कराने वाले
क्ष्रृगी ऋषि का आक्ष्रम बस्ती के धार्मिक महत्व को
और आधिक बढता है। राम विवाह का प्रसग भी बस्ती जिले से जुडता है।
मिथिला से विवाह बाद राम ने दुल्हन के रुप मे जनकी
को जिस रास्ते से लेकर
अयोध्या आए, उस मार्ग का बडा हिस्सा बस्ती जिले के दक्षिणी भाग से गुजरता है,
जिसे आज भी राम-जनकी मार्ग से जाना जाता है।
बस्ती के ऐतिहासिक महत्व को कभी भुलाया नही जा सकता
है। यहॉ राजा नगर उदय प्रताप सिह ने अँग्रेजो के खिलाफ बिगुल बजाया तो पूरे जनपद
मे आजदी के लिये एक अलख जग गई।
आमोढा की रानी तलाश कुवरि के बलिदान को कभी भुलाया
नही जा सकता है।
अँग्रेजो से लडते-लडते उन्होने आपने जीवन का बलिदान
दिया तो छवनी मे 150 से आधिक स्वतत्रता सग्राम सेनानियो को एक साथ पीपल के पेड पर
लटका कर फासी देने का गवाह पीपल का वृक्ष आज भी लोगो के क्ष्रध्दा का केन्द्र बना
हुआ है।
पौडा मे शिवगुलाम सिह ने अँग्रेजो से लोहा लिया और बस्ती की धरती को इतिहास के पन्नो में अजर अमर किया।
नए युग में बस्ती के सपूतो ने आपना नाम
देश-विदेशो में रोशन किया। हिंदी को नई विधा देने के साथ उसका इतिहास लिखने वाले
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जन्म स्थली बस्ती जनपद का अगौना गाँव है। हिंदी जगत में
तारे की तरह चमकने वाले साहित्कार डॉ. लक्ष्मी नारायण लाल का जन्म बहादुरपुर
क्षेत्र के जलालपुर गॉव में हुआ, वही सवेश्वर दयाल सक्सेना ने बस्ती के नाम को विश्व पटल पर अकित करने में कोई
कसर नही छोडा